वो नदी सी मुझ पत्थर के ऐब मिटा गयी,
जो मैंने माँगा उसका साथ , मुझे छोड़ वो सागर में समा गयी |
आज मैं रत्नो में श्रेष्ठ हु ,
मुकुटों में जड़ने योग हु
सब मेरे गुण को सराहते है ,
पर मुझे ऐसा बनाने वाली नदी को नहीं पहचानते है |
आज भी उस नदी कि याद आती है ,
समा जाऊ उसमे ये इच्छा जगती है |
पर जो बिछड़े, फिर कहा वो मिल पाते है
पत्थर के रूह पर ना दिखने वाले लहरो के बस निशान रह जाते है .. बस निशान रह जाते है |
Wednesday, December 4, 2013
Monday, August 19, 2013
अमावास थी जिंदगी
यू तो अमावास थी जिंदगी
तुझे देखा तो चाँद का दीदार हुवा
ता उम्र लड़ा मैं खुद से
तुझे पाया तो खुद से भी प्यार हुवा (स जे )
Sunday, June 2, 2013
परो को काट दे दुनिया
मेरे परो को काट दे दुनिया बेशक मैं उड़ ना पाऊंगा
पर जब तक धकेगा ये दिल , ये आशमा मैं तुझे ही चाहूँगा (SJ)
पर जब तक धकेगा ये दिल , ये आशमा मैं तुझे ही चाहूँगा (SJ)
मन
जब खुले थे तो खुद ही जा उलझा था उसकी जुल्फों में
आज खुद ही उससे निकलने को कहता है मन
जाने किन भावों में बहता है मन
अजीब कश्मकश में रहता है मन
जब पास थी तो उससे दूर जाने का करता था मन
आज दूर है तो उसके लिए तड़पता है मन
होश में होकर भी मदहोश रहता है मन
अजीब कश्मकश में रहता है मन (SJ)
आज खुद ही उससे निकलने को कहता है मन
जाने किन भावों में बहता है मन
अजीब कश्मकश में रहता है मन
जब पास थी तो उससे दूर जाने का करता था मन
आज दूर है तो उसके लिए तड़पता है मन
होश में होकर भी मदहोश रहता है मन
अजीब कश्मकश में रहता है मन (SJ)
Tuesday, May 21, 2013
यादे
अब यादे भी दुरिया पार नहीं कर पाती . ... तेरी याद जो पहले आती थी वो अब नहीं आती
रोज करता हु बंद आँखों से तेरे दीदार की कोशिश ..... पर वो तस्वीर अब नज़र नहीं आती
रोज करता हु बंद आँखों से तेरे दीदार की कोशिश ..... पर वो तस्वीर अब नज़र नहीं आती
Friday, May 17, 2013
दिल
मेरे परो को काट दे दुनिया , बेशक मैं उड़ ना पाऊंगा
पर जब तक धड़केगा ये दिल , ये आशमा मैं तुझे ही चाहूँगा
Sunday, May 5, 2013
Saturday, May 4, 2013
Diya aur Suraj
मैं दिया हूँ , सूरज से मेरा क्या मुकाबला
बस मैं वहाँ साथ दूँगा जहाँ वो साथ छोड़ जाएगा
बस मैं वहाँ साथ दूँगा जहाँ वो साथ छोड़ जाएगा
Subscribe to:
Comments (Atom)